Browsing Category: Aarti Sangrah

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Aarti Shri Krishan Ji Ki

॥ आरती श्री कृष्ण जी की ॥ ॥ Aarti Shri Krishan Ji Ki ॥ ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे । भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे ॥ जय जय श्री कृष्ण हरे…. परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी । जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी ॥ जय जय श्री कृष्ण हरे…. कर कंचन कटि कंचन श्रुति कुंड़ल माला । मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला ॥ जय…

Hanuman Ji Ki Aarti

॥ हनुमानजी की आरती ॥ ॥ Hanuman Ji Ki Aarti ॥ मनोजवं मारुत तुल्यवेगं ,जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥ वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं , श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ आरती किजे हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे | रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥ अंजनी पुत्र महा बलदाई | संतन के प्रभु सदा सहाई ॥ दे वीरा रघुनाथ पठाये | लंका जाये सिया सुधी लाये ॥…

Aarti Shri Narasimha Bhagwan Ki

॥ आरती श्री नरसिंह भगवान की ॥ ॥ Aarti Shri Narasimha Bhagwan Ki ॥ ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥ १ ॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी। अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ २ ॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु…

Aarti Shri Jagdish Ji

॥ आरती श्री जगदीश जी ॥ ॥ Aarti Shri Jagdish Ji ॥ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ १ ॥ ॐ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ २ ॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ…

Aarti Shri Guru Dev Ji Ki

॥ आरती श्री गुरु देव जी की ॥ ॥ Aarti Shri Guru Dev Ji Ki ॥ जय गुरुदेव दयानिधि दीनन हितकारी, स्वामी भक्तन हितकारी । जय जय मोह विनाशक भव बंधन हारी ॥ ॐ जय जय जय गुरुदेव । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव, गुरु मूरति धारी, वेद पुराण बखानत, गुरु महिमा भारी । ॐ जय । जप तप तीरथ संयम दान बिबिध दीजै, गुरु बिन ज्ञान न होवे, कोटि जतन कीजै ।…

Shiv Ji Ki Aarti

॥ शिवजी जी की आरती ॥ ॥ Shiv Ji Ki Aarti ॥ जय शिव ओंकारा हर जय शिव ओंकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा ॥ टेक॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे हंसानन गरुडासन वृषवाहन साजे ॥ जय॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ जय॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ जय॥ श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे सनकादिक गरुडादिक भूतादिक संगे ॥…

Shri Ganesh Ji Ki Aarti

॥ श्री गणेश जी की आरती ॥ ॥ Shri Ganesh Ji Ki Aarti ॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा । माता जाकी पारवती पिता महादेवा ॥ एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी । माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी ॥ पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥ अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया । बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया ॥…

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